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अयोध्या में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन | श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावों में किया उल्लेखनीय योगदान

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (यूपी एसएलएसए) के निर्देशन में शनिवार को मोटर दुर्घटना दावा प्रतिकर न्यायाधिकरण (एमएसीटी) अयोध्या में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने सराहनीय प्रदर्शन करते हुए बीमा कंपनी के हितों की रक्षा के साथ-साथ दर्जनों मोटर दुर्घटना प्रतिकर वादों का त्वरित निस्तारण करवाया। यह राष्ट्रीय लोक अदालत वर्ष 2026 की पहली प्रमुख लोक अदालत थी। जिसका आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) के मार्गदर्शन में देशभर में किया गया। अयोध्या में मुख्य रूप से मोटर दुर्घटना दावा (एमएसीटी) मामलों पर फोकस रहा, जहां पीड़ित पक्षों और बीमा कंपनियों के बीच आपसी समझौते से विवाद सुलझाए गए। इससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आई और लंबित मामलों का बोझ कम हुआ।श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी की टीम ने इस लोक अदालत में सक्रिय भागीदारी निभाई। टीम में शामिल प्रमुख अधिकारी अश्विनी धनावत नेशनल लीगल हेड / चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर सहित उच्च पदाधिकारी के. के. शर्मा (रीजनल मैनेजर), राजेश चंद्र शुक्ला (सहायक प्रबंधक), अंकित दीक्षित विधि अधिकारी आदि मौजूद रहे। अधिकारियों ने कंपनी के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए अधिकाधिक संभव मामलों का निपटारा किया। उनकी रणनीतिक दृष्टि, कानूनी समझ और समझौता कौशल के कारण कई जटिल मोटर दुर्घटना दावों में संतोषजनक समझौते हुए, जिससे पीड़ितों को उचित मुआवजा मिला और कंपनी को अनावश्यक लंबी कानूनी लड़ाई से मुक्ति मिली।

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उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के इस प्रयास की सराहना करते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि लोक अदालतें न केवल न्यायिक बोझ कम करती हैं, बल्कि आम जनता को सस्ता, तेज और संतोषजनक न्याय प्रदान करती हैं। मोटर दुर्घटना मामलों में ऐसे समझौते विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इससे पीड़ित परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता मिलती है। श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी के इस योगदान को अयोध्या के विधिक हलकों में प्रशंसनीय एवं प्रेरणादायक बताया जा रहा है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसी लोक अदालतों में सक्रिय सहयोग जारी रखेंगे ताकि अधिक से अधिक विवाद आपसी सहमति से सुलझ सकें।य ह सफलता राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित लोक अदालत की व्यापक उपलब्धि का भी हिस्सा है, जहां देशभर में लाखों मामलों का निस्तारण हुआ और अरबों रुपये के समझौते संपन्न हुए। अयोध्या में एमएसीटी न्यायाधिकरण की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि लोक अदालतें भारतीय न्याय व्यवस्था की रीढ़ हैं।

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