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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ का ऐतिहासिक फैसला | बिजली कनेक्शन जीवन का मौलिक अधिकार

लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिजली कनेक्शन प्राप्त करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न अंग है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजली किसी विशेषाधिकार की बजाय गरिमापूर्ण जीवन जीने का मौलिक अधिकार है, इसलिए किसी भी व्यक्ति को, जो किसी परिसर में कानूनी रूप से रह रहा हो, बिजली से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अबधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने दिया। मामले की सुनवाई प्रीति शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य रिट याचिका संख्या-2072/2026 पर हुई।
रायबरेली जनपद निवासी याचिकाकर्ता प्रीति शर्मा अपने पति और ससुराल पक्ष के साथ लगभग 20 वर्षों से एक संयुक्त घर में रह रही थीं। पारिवारिक विवाद के चलते ससुराल पक्ष ने उनके बिजली कनेक्शन को कटवा दिया, भले ही वे नियमित रूप से बिल जमा कर रही थीं। इसके बाद प्रीति शर्मा ने बिजली विभाग में नया घरेलू कनेक्शन के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने आवेदन खारिज कर दिया।इसके विरोध में उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में उन्होंने बताया कि बिजली कटने से उनके नाबालिग बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, खासकर सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी।
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा बिजली कनेक्शन पाना अनुच्छेद 21 के अंतर्गत संरक्षित मौलिक अधिकार का हिस्सा है। यदि कोई व्यक्ति किसी परिसर में निवास कर रहा है तो वह बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का हकदार है। पारिवारिक विवाद या ससुराल पक्ष की आपत्ति के आधार पर इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। बिजली विभाग द्वारा याचिकाकर्ता के आवेदन को खारिज करने का आदेश रद्द किया जाता है। बिजली विभाग को 4 सप्ताह के अंदर याचिकाकर्ता को नया बिजली कनेक्शन देने के निर्देश दिए गए। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बिजली के अभाव में बच्चों की शिक्षा प्रभावित होना शिक्षा के अधिकार से भी जुड़ा मुद्दा है।
यह फैसला उन हजारों महिलाओं के लिए राहत की किरण साबित हो सकता है, जो वैवाहिक या पारिवारिक विवादों में ससुराल पक्ष द्वारा बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर दी जाती हैं। इस फैसले से बिजली विभागों की मनमानी पर अंकुश लगेगा और आम नागरिकों, खासकर महिलाओं व बच्चों के गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार को मजबूती मिलेगी। प्रीति शर्मा ने कोर्ट के फैसले पर राहत व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनके बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से चल सकेगी और परिवार में न्याय की भावना बनी रहेगी। बिजली विभाग के अधिकारियों को अब कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए चार सप्ताह के अंदर नया कनेक्शन जारी करना होगा। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो याचिकाकर्ता कंटेंट ऑफ कोर्ट की कार्यवाही कर सकेंगी।

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