
मध्यप्रदेश के गुना जिला अस्पताल के मुर्दाघर में पोस्टमॉर्टम के लिए लाए गए एक शव ने अचानक आंखें खोल दीं। कुछ पलों के लिए इधर-उधर देखा, फिर खुद पर नजर डाली और नग्न अवस्था में ही बाहर की ओर दौड़ लगा दी। आसपास मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर स्तब्ध रह गए। पीएम हाउस के बाहर खड़े स्टाफ, परिजन और मरीजों ने जब एक युवक को बदहवास हालत में नंगे बदन भागते देखा तो उनके होश उड़ गए।
दरअसल, यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के गुना जिले के जिला अस्पताल में बुधवार को हुई हकीकत है। डॉक्टरों की कथित लापरवाही ने पूरे अस्पताल परिसर में दहशत मचा दी। 20 वर्षीय युवक ने आत्महत्या के इरादे से सल्फास खा लिया था। उसे गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया और पोस्टमॉर्टम के लिए मुर्दाघर भेज दिया। युवक को मुर्दाघर की ठंडी मर्चुरी (मॉर्टरी) टेबल पर रखा गया। कपड़े उतार दिए गए थे। ठंडी सतह पर लेटे-लेटे अचानक उसकी सांसें लौट आईं।
होश आने पर उसने देखा कि वह नग्न अवस्था में है। डर और भय से घबराया युवक तुरंत उठ खड़ा हुआ। एक पल को इधर-उधर देखा, फिर जान बचाने के लिए मुर्दाघर से बाहर की ओर दौड़ लगा दी। पीएम हाउस के आसपास मौजूद लोगों ने यह दृश्य देखा तो उनकी रूह कांप गई। “एक शव उठकर भाग रहा है!” की चीखें गूंजने लगीं। मरीज, तीमारदार और अस्पताल स्टाफ दहशत में इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोग तो डर के मारे चिल्लाते हुए बाहर निकल गए। युवक को कुछ दूरी पर जाकर अस्पताल सुरक्षा और स्टाफ ने पकड़ लिया।
तुरंत उसे दोबारा चिकित्सकीय जांच के लिए वार्ड में भर्ती कराया गया। जिला अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि युवक को शुरू में बेहोशी की हालत में लाया गया था। डॉक्टरों ने पल्स, हृदय गति और अन्य संकेतों की जांच की, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए उन्हें मृत मान लिया गया। लेकिन वास्तव में युवक गहरी बेहोशी की अवस्था में था, जिसे मृत्यु समझ लिया गया। यह घटना अस्पताल की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। अस्पताल परिसर में इस घटना से हड़कंप मच गया। कई मरीजों और उनके परिजनों ने डर के मारे अस्पताल छोड़ने की कोशिश की। स्टाफ सदस्यों ने बताया कि “हमने कभी ऐसा नहीं देखा।
शवागार से कोई जिंदा निकलकर भाग रहा हो—यह देखकर हम सब सकते में आ गए।” वर्तमान में युवक की हालत स्थिर बताई जा रही है। उसे गहन निगरानी में रखा गया है। घटना की जानकारी जिला प्रशासन और पुलिस को दे दी गई है। डॉक्टरों की लापरवाही की जांच के आदेश दिए जा सकते हैं। यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय जांच, मॉनिटरिंग और मृत्यु घोषणा की प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। ऐसे मामलों में कई बार गहरी बेहोशी को मृत्यु समझ लिया जाता है, जिससे परिवार और समाज दोनों सदमे में रह जाते हैं। गुना जिला अस्पताल प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।






