
पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने को लेकर दाखिल एक याचिका पर हाई कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार से जवाब मांगा है.
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को समय पर संपन्न कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने इम्तियाज हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है. अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 243 ई का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता. याचिका में तर्क दिया गया है कि वर्तमान ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए इससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी होना अनिवार्य है।

याचिकाकर्ता ने अदालत को अवगत कराया कि राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के प्रकाशन की समय-सीमा में बार-बार बदलाव किया है. पहले इस प्रक्रिया को दिसंबर 2025 तक पूर्ण होना था, लेकिन अब नवीनतम अधिसूचना के अनुसार इसे बढ़ाकर 15 अप्रैल 2026 कर दिया गया है. याची का कहना है कि यदि मतदाता सूची ही अप्रैल के मध्य तक फाइनल होगी, तो आरक्षण की जटिल प्रक्रिया और चुनाव संपन्न कराने के लिए बहुत कम समय बचेगा. ऐसी स्थिति में चुनाव टलने की आशंका बढ़ गई है, जिससे पूर्व की भांति प्रशासकों की नियुक्ति की नौबत आ सकती है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के अधिकारों के बीच संतुलन पर पुरानी न्यायिक मिसालों का भी जिक्र किया. ‘प्रेम लाल पटेल’ मामले का उदाहरण देते हुए पीठ ने कहा कि चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण का संवैधानिक अधिकार पूरी तरह से निर्वाचन आयोग के पास सुरक्षित है. अदालत ने राज्य सरकार से उन संशोधनों की संवैधानिक स्थिति स्पष्ट करने को कहा है जो पूर्व में घोषित किए गए थे. कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप न हो.
हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को एक विशेष हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें समयबद्ध चुनाव की संभावना स्पष्ट करनी होगी. आयोग को यह बताना होगा कि क्या 15 अप्रैल को मतदाता सूची आने के बाद 26 मई तक चुनाव संपन्न कराना व्यावहारिक रूप से संभव है. अदालत ने अगली सुनवाई की तिथि 25 मार्च 2026 तय की है और अपेक्षा की है कि तब तक चुनाव का पूरा विस्तृत कार्यक्रम रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किया जाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए महाधिवक्ता या अपर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का अनुरोध किया गया है।




