अयोध्या। रामजन्मभूमि अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की काले रंग की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। आइए जानें इसके बारे में….

राम मंदिर में प्रभु श्रीराम बालक राम के रूप में विराजमान हैं। 5 वर्ष के बालक के तौर पर रामलला की प्रतिमा बनाई गई है। दरअसल वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, प्रभु राम का उल्लेख श्यामल वर्ण के रूप में किया गया है। निलांबुज श्यामल कोमलंगम के तर्ज पर भगवान राम की प्रतिमा बनाई गई है। इतना ही नहीं मंदिर में स्थापित की गई भगवान राम की मूर्ति का निर्माण श्याम शिला से तैयार किया गया है।दरअसल जिस पत्थर से प्रभु राम की प्रतिमा का निर्माण किया है, उसका रंग भी काला था। उस पत्थर का नाम कृष्ण शिला है और इस पत्थर का रंग काला ही होता है। यही वजह है कि मूर्ति का रंग श्यामल है। शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण शिला से बनी राम की मूर्ति खास होती है। इसी कारण इस मूर्ति को श्याम शिला से बनाया गया है। श्याम शिला की आयु हजारों सालों की होती है। इससे श्रीराम की मूर्ति हजारों सालों तक अच्छी सही रहेगी। इसी के चलते मूर्ति को जल, चंदन, रोली या दूध से किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होगा। जानकारी के अनुसार, जन्मभूमि में बालस्वरूप की पूजा की जाती है। इसी वजह से श्रीराम की मूर्ति बालस्वरूप में है।





