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भारत विभाजन देश के लिए सबसे अधिक कष्टदायक – कुलपति

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौ‌द्योगिक विश्वविद्यालय में विभाजन की विभीषिका दिवस पर के अवसर पर भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास में विस्थापितों का योगदान विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डा. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि हमारा भारत देश विभिन्नताओं का देश होने के बाद भी एकता वाला देश है। भारत विभाजन का दौर देश के लोगों के लिए सबसे कष्ट वाला दौर था।

कुलपति ने कहा कि अनगिनत लोगों को अपना घर, जमीन सब कुछ छोड़ना पड़ा और अपने ही देश में शरणार्थी बनकर रहना पड़ा। कृषि अधिष्ठाता डा. प्रतिभा सिंह ने कहा कि लूट-पाट और कत्लेआम की भयानक स्थिति ने देश को घेर लिया था। स्मृति दिवस पर हम उन अनगिनत लोगों को याद करते हैं जो विभाजन की भयावहता से प्रभावित हुए और उन्हें बहुत नुकसान झेलना पड़ा। अपर निदेशक प्रसार डा. आर. आर सिंह ने कहा कि वर्ष 1947 में विभाजन के कारण मानव जाति के इतिहास में सबसे विनाशकारी विस्थापनों में से एक देखा गया। इस विभाजन का सबसे अधिक देश जिस राज्य ने झेला वह पंजाब था।

इस मौके पर विवि के अजीत सिंह, अरुण, अभिषेक, आदित्य, निशा कुमारी एवं श्वेता ने भाषण प्रस्तुत किया। डॉ शशांक सिंह ने टेली फिल्म के माध्यम से छात्र-छात्राओं को विभाजन की परिस्थितियों से परिचित कराया । डॉ डी नियोगी के संयोजन में कार्यक्रम आयोजित हुआ। कुलपति के सचिव डॉ जसवंत सिंह अतिथियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया तथा संचालन डा. सीताराम मिश्रा ने किया। इस मौके पर विवि के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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