
अमानीगंज अयोध्या। विकासखंड अमानीगंज में बुधवार को ब्लॉक परिसर में नहीं लगा ब्लॉक दिवस शिविर फरियादी मायूस लौटने को हुए मजबूर।
शासन की महत्वकांक्षी योजना के अनुरूप प्रदेश के सभी ब्लॉकों में माह के प्रत्येक प्रथम व तृतीय बुधवार को ब्लॉक दिवस का आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी अधिकारियों का उपस्थित होना अनिवार्य होता है। जिससे ब्लॉक में आए हुए फरियादियों की समस्या को सुनकर उनका निस्तारण किया जा सके।
लेकिन अमानीगंज ब्लाक में ऐसा देखने को नहीं मिला।

अमानीगंज ब्लॉक में आए हुए फरियादी ने बताया कि अमानीगंज ब्लाक में ब्लॉक दिवस का आयोजन नहीं किया जाता, यदि किया भी जाता है तो अधिकारी अनुपस्थित रहते हैं। यदि सौभाग्य से अधिकारी मिल भी गए तो फरियादी की फरियाद सुनने को तैयार नहीं होते।
खंडासा गांव निवासी किसान चंद्र प्रकाश पांडे ने बताया कि पिछले 2 साल से वह पशु शेड के लिए आवेदन कर रहे हैं लेकिन उन्हें अभी तक पशु शेड नहीं मिला। उन्होंने यह भी बताया कि इस बीच ग्राम पंचायत खंडासा में लगभग 25 पशुशेड का आवंटन किया गया जिसमे उनका नाम नही आया। साथ ही यह भी बताया कि जिम्मेदार अधिकारी ब्लॉक दिवस पर नदारद रहते है, यदि मिल भी जाते हैं तो सीधे तरीके से बात नही करते फोन से संपर्क करने पर फोन नहीं उठाते जिसका फरियादी ने रोष व्यप्त किया।
बुधवार सुबह 11 बजे जब हकीकत जानने सूर्या न्यूज़ इंडिया की टीम ब्लॉक मुख्यालय अमानीगंज पहुंची तो वहां कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। पूछने पर पता चला कि योग दिवस के वजह से हो सकता है लेट लपाट हो गए हो उसके बाद जब ब्लॉक दिवस के बारे में जानकारी चाही गई तो पाया गया की फरियादियों के बैठने तक का इंतजाम तक नहीं था।
शायद सभी अधिकारी व कर्मचारी भूल गए थे कि आज ब्लॉक दिवस भी है।
तत्पश्चात आनन फानन में लगभग 12:30 बजे कुछ कर्मचारियों द्वारा कुर्सी मेज लगाया गया मगर कोई भी अधिकारी कर्मचारी फरियाद सुनने कुर्सी पर नहीं बैठे।

इस बारे में खण्ड विकास अधिकारी चन्द्र प्रकाश उपाध्याय से जानकारी चाही गई तो उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा, इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी अनीता यादव से जानकारी चाही गई तो उन्होंने बताया कि ब्लॉक दिवस होना चाहिए यदि नहीं हुई है तो जिम्मेदार अधिकारी से इसकी समीक्षा की जायेगी।
अब देखना यह है कि ब्लॉक दिवस जैसी शासन की महत्वकांक्षी योजनाओं पर पानी फेर रहे जिम्मेदार अधिकारियों पर कब तक प्रशासन मेहरबान रहता है, और कब तक मायूस किसानों को अधिकारों से वंचित रहना पड़ेगा।




